हसरत

कहने को तो

ज़िन्दगी भर की हसरतें हैं

एक वो चाँद है

और तारें हैं

पश्मीने वाली रात भी है

और रुई के बादल सारे हैं

नज़र से झटके छींटे हैं

जो हर ख्याल के रंग में मैंने

आसमान पे मारे हैं

खाट की दायीं तरफ से देखो

फलक बटोरा आधा है

और दूजे हिस्से को पूरी

कायनात का वादा है

कायनात जो आधी आधी

तेरी दोनों आँखों में

पैर पसारे बैठी है

और ऊपर गिरती पलकें हैं

जो मुंह मांगे से ज़्यादा है