सुन री सजनिया

सुन री सजनिया
अब कै बारे
अधूरा सावन आयौ री

 

मैं बरखा मूसलधार अकेला
भीगे नैन नहायो री

 

हूक सुनाई देवै थी बस
हूक सुनाई देवै थी ना
कूक सुनाई देवै थी

 

जब जब कोयल कूकी तब तब
वा नै मोहे रुलायो री

 

बहता पानी गिर जावै और
गिरता पानी रुक जावै और

 

मुख पै छोड़ै छाप
जिया ने ऐसौ दरद बहायो री

 

अब कै बारे
अधूरा सावन आयौ री