शब की सुनिये

चाँद की तारों से
और तारों की
फलक से सुनिये
शब् की आँखें भारी हैं
रब की पलक से सुनिये
शब् से ज़्यादा
सब से ज़्यादा
झीलों को ही
इश्क़ है शब् से
जब से वो
पानियों की परत है
शब् की झलक से सुनिये
आवाज़ भी शब् की
हवा कभी ना
मिटने देती हैं देखो
बरक़रार है
चाहे जितनी भी दूर तलक से सुनिये
शब् के जिगरी
बादल नख़रेबाज़ बगल में
रुई दबा कर बैठे हैं
गर रूठ गए
तो बरसेंगे
बातें इनकी
अलग से सुनिये
शब् भी कल बतियेगी
अभी उसे सो जाने दें
शब् की आमद
चाँद की आहट
तारों की खनक से सुनिये