वो दोनों

एक वो है कि रोते हुए थकता ही नही
और एक ये है कि बस उसे रोता देखे जाए है

 

तगाफ़ुल की ओट में छुपते नही आंसू
गीला मुखौटा सूखने में देर लगाए है

 

चुप्पी की बारिश में भला क्या वो भीगेंगे
गिरती नहीं है बूंद कि हवा हो जाए है

 

दर्द देखो किसका और निजात पाए कौन
जल रही है लौ और मोम पिघला जाए है

 

धुंधला सा दिख रहा है दोनो को आजकल
जो लब से ना निकले वो आंखों पे छा जाए है