बे-ग़ैर

तेरे हाथों से लिखे

हर्फ़ की तमन्ना में जान दूँ

या इस बात पे जान दूँ

की वो मेरा नाम है शायद

किस सिम्त ऐ फ़क़ीरी

मेहबूब मिलेगा

किस ओर से आँधियाँ

वो सफा उठा के लाएंगी

तू भीड़ में यूँ मदहोश घूमेगा

तो कैसे बनेगी

इश्क़-ए-बेसबब

सराब है यानी

तू पैग़म्बर तो है नहीं

जो सब से बतिया लेगा

आ मान जा आदम

जो तू माने तो जान दूँ