Archives

किसी ख़याल में घोला था

किसी ख्याल में घोला था मैंने तुझे शायद

तूने गले लगाया था ना जिस रोज़

तेरी रूह पी गया था मैं कच्ची

जिस्म से जिस्म की ओख लगा कर

तेरे रुखसारों से

जब तक आंसू गिरते नहीं देखे थे मैंने

continue reading...

रफ़ू

सी सी गयी है
रूह में उनकी
मेरी रूह-ओ-ज़ीस्त
कुछ यूँ
की मुहब्बत
ने अब मुझे

रफू कर दिया है

continue reading...

उम्मीद

कायनाती गुलिस्तां की तलाश में निकली
एक महकती हुई आरज़ू को अगर
ज़िंदगी की लू के कैड़े से थपेड़े
झिंझोड़ें डरा दें
परेशान सा छोड़ें
उसे ओस बना दें
उस की सबा से उस की

continue reading...

सुनो शायर

हो सकता है
की कभी ना हुआ हो

ख्वाब से चूल्हे में उठती
तमन्ना की आंच का
नकली ये धुआँ हो

यूँ भी तो हो सकता है

continue reading...

28 शिवालिक

ज़र्द सभी रातों के
सूने सूने से समंदर
कभी मेरे तो कभी तेरे दिल के अंदर
झुंझलाये हुए ख़्वाबों की लहरों में गोते लगाते…

continue reading...

बॉम्बे ड्रीम्स

अमलतास के पीछे से
पच्छिम की ओर से आती है जो

पछुआ है की आस है वो

है सपन नगर के डाकिए की
साइकल की वो घंटी क्या

या माइग्रेटरी कोई चिड़िया है…

continue reading...