तलाश अशआरों की

तलाश अशआरों की है
मिल जाना तेरा
मुझे नज़्म-ए-हासिल
तू है कुछ इस कदर

 

देखो टपक रहा है
बादलों से खूं
दरिया का हुआ है
कुछ क़त्ल इस कदर

 

झुक जाये कहकशां
मैं उचक के तोड़ लूँ
बतला दे कोई
देखूं मैं
ख़्वाबों को किस कदर

 

जो भी पढ़े सहफे
तुझे उलझन क़रार दे
काग़ज़ों पे सलवटें
आईं हैं इस कदर

 

एक तू ही नहीं है
खामोश जहां में
एक मैं ही नहीं हूँ
जो चीखे है इस कदर

 

तेरा स्याह रंग है लल्लन
मेरा कुसूर पर
तुझे और किस रंग में
पाऊं मैं इस कदर