चले आओ

चले आओ कि वक्त्त ठहरा हुआ है
और बैंगनी ये आसमां फैला जाये है
चले आओ कि नज़र थक गयी है
चले आओ कि रहकर भी न रहा जाये है

तुम आओगे तो देखेंगे कि..
आखिर हासिल का क्या रंग है
और देखेंगे हम कि
क्या क्या तुम्हारे संग है
चले आओ कि अब और
हमसे न देखा जाये है

और आओ तो यूं आना
कि लगे ही ना तुम आये हो
ठहरा रहे वक्त्त और
फैलता रहे आसमां
बस एहसास हो कि तुम हो

इससे ज़्यादा और भला
कब मुझसे सोचा जाये है
ये भी अगर हो जाये तो
मुझे मौत आ जाये है

चले आओ कि अब

इतना ही कहा जाये है