कलाकार

कलाकार आम इंसानों में

शरीक़ नही होते…

उधर वो कूड़े के ढ़ेर में

खाना यूँ ढूँढ रही थी

इधर वो हैरानी

नज़र से कैमरे पर

यूँ छापे जा रहा था

उसकी भूख से शायद

इसकी कला का पेट

यूं भर रहा था

क्यूँ नहीं आगे बढ़ा वो

खाना खिलाने उस बच्ची को

ये क्यूँ उस ने महज़

तस्वीर उतारी उस मंज़र की

ये क्यूँ पूछना

कलाकार का काम नहीं

उसका कर्म है

कला उस की

वो वही करेगाा

क्या तुम ने कभी ये सोचा

की शायद वो भी भूखा था कई दिन का

या शायद उस की वो तस्वीर ही

उस का ‘क्यूँ’ थी

माड़ सा कहा करते थे

कलाकार आम इंसानों से

कहीँ बढकर होते हैं

उनमे शरीक नही होते

शायद…

सच ही कहा करते थे