उम्मीद

कायनाती गुलिस्तां की तलाश में निकली
एक महकती हुई आरज़ू को अगर
ज़िंदगी की लू के कैड़े से थपेड़े
झिंझोड़ें डरा दें
परेशान सा छोड़ें
उसे ओस बना दें
उस की सबा से उस की
दोपहरों को तोड़ें
फिर कहाँ तलक उसकी महक जाएगी बोलो
वो महकेगी भी
या लू में दहक जाएगी बोलो
ये कहना कठिन है की जो होगा सो होगा
फिर भी यूँ कहो की आदतन यूं ही कहना होगा
ज़िंदगीनुमा भभकती सी लू के ठीक बीचोंबीच
तमन्ना के सराबों को रखते हुए मद्देनज़र
कायनाती गुलिस्तां की तलाश में बेसबब
नखलिस्तान सी आरज़ू को
यूँ ही महकते रहना होगा