अम्मी

सबा की आमद से

कुछ ही देर पहले

पहन लो अपनी नेमतें

ओढ़ो दुआएं

भूल जाओ

की जिस्म जैसा भी है कुछ

या दुनिया में है

सब फलाना फलाना

अगर कोई है

तो बस अम्मी है

और बस

यही सच है

की मिरे ख़्वाबों

और आदतों में

उस की हामी का फ़र्क़ है

जब घुटनो पे चला करते थे

तब की सोचो

और बूझो

ज़िन्दगी के दायरे

अब भी

एक दुपट्टे भर से

माप सकते हो क्या

सबा की आमद से

कुछ ही देर पहले

सूरत-ए-आरज़ू

जब सो रही होगी

नमाज़ी बनो

ओढ़ो वही दुपट्टा

और सबा से कहो

खुदा-या

वो आए तो

यूं आए